1 सचमुच हम चुपचाप होके परमेश्वर के ओर मन लगईले हई , हमार उद्धार वोनही से होला । 2 सचमुच उहअ , हमार चट्टान अऊर हमार उद्धार हयन , उ हमार गढ़ हयन , हम जादा न डिगबला । 3 तू कब तक एक आदमी पे धावा करत रहबअ , कि सब मिल के वोकर घात करअ ? उ त झुकल दीवार या गिरल बाड़ा के जइसन हयन । 4 सचमुच उ लोग वोके , वोकरे ऊँचा पद से गिरावअ क योजना करलन ; उ झूठ से खुश रहलन। मुँह से त उ आर्शीवाद देलन पर मन में कोसलन । 5 हे हमार मन , परमेश्वर के सामने चुपचाप रहअ , काहे कि हमार आशा वोनही से हव । 6 सचमुच उहअ हमार चट्टान , अऊर हमार उद्धार हयन , उहअ हमार गढ़ हयन ; एही से हम न डिगबला। 7 हमरे उद्धार अऊर हमरे महिमा क आधार परमेश्वर हयन ; हमार मजबूत चट्टान , अऊर हमार शरणस्थान परमेश्वर हयन । 8 हे सब लोग , हर समय उनकरे पे भरोसा रखअ ; ओनसे अपने - अपने मन क सब बात खोल के कहअ ; परमेश्वर हमार शरणस्थान हयन । 9 सचमुच नीच लोग त अस्थिर , अऊर बड़ा लोग झूठा ही हयन ; तौल में उ हलका निकललन ; उ सब क सब साँस से भी हलका हयन । 10 अन्धेर करअ पे भरोसा मत रखअ , अऊर लूट पाट करअ पे मत फूलअ ; चाहे धन सम्पत्ति बढ़अ , तब भी वोकरे पे मन मत लगायअ । 11 परमेश्वर एक बार कहले हयन ; अऊर दू बार हम इ सुनले हई : कि सामर्थ्य परमेश्वर क हव ; 12 अऊर हे प्रभु , करुणा भी तोहार हव । काहे कि तू एक एक लोग के वोकरे काम के अनुसार फल देलअ ।