पाठ 39

1 हम कहली, "हम अपने चालचलन मे चौकसी करब, ताकि हमरे जीभ से पाप न होवअ; जब तक दुष्ट हमरे सामने हयन, तब तक हम लगाम लगईले आपन मुँह बन्द कईले रहब।" (याकूब 1:26)। 2 हम चुप्पी साध के गूंगा बन गए, अउर भलाई के ओरी से भी चुप्पी सधले रहे; अउर हमार पीड़ा बढ़ गयल, 3 हमार दिल अन्दर ही अन्दर जरत रहल*। सोचत-सोचत आग भड़क उठल; तब हम अपने जीभ से बोल उठे। 4 "हे यहोवा, अइसन करा कि हमार अन्त मालूम हो जाए, अउर ई भी कि हमरे उमर क दिन केतना हव; जेसे हम जान लेई कि कइसन अनित्य हई! 5 देखा, तू हमार उमर बालिश्त भर क रखले हयअ, अउर हमार जीवनकाल तोहरे नजर में कुछ हव ही नाहीं। सच्चों मे सब मनुष्य कइसे ही स्थिर काहे न होंवअ ताभो व्यर्थ ही ठहरल हयन। (सेला) 6 सच्चों में मनुष्य परछाईं के तरे चलअला-फिरअला; सच्चों उ व्यर्थ में घबरालअन; उ धन क संचय त करअलन लेकिन नाहीं जानअलन कि ओके के लेई! 7 “अब हे प्रभु, हम कउने बात क बाट जोही? हमार आशा त तोहरे ओरी लगल हव।" 8 हमके हमरे सब अपराधन के बंधन से छुड़ा ल। मूर्ख हमार निन्दा न करंअ पावअ । 9 हम गूँगा बन गए अउर मुँह न खोले; काहे कि ई कम तोंहीं कईले हयअ । 10 तू जवन विपत्ति हमरे पे डलले हयअ ओके हमसे दूर कर द, काहे कि हम त तोहरे हाथ के मार से भस्म भयल जात हई। 11 जब तू मनुष्य के अधर्म के चलते डाँट-डपटके ताड़ना देलअ; त तू ओकरे सामर्थ्य के पतंगा के तरे नाश करअलअ; सच्चों में सब मनुष्य वृथाभिमान करअलन 12 "हे यहोवा, हमार प्रार्थना सुना, अउर हमरे दुहाई पे कान लगावा; हमार रोआई सुन के चुप मत रहा! काहे कि हम तोहरे संगे एक परदेशी यात्री के तरे रहीला, अउर अपने सब पुरखा लोग के तरे परदेशी हई।(इब्रा.11:13) 13 आह! एकरे पहिले कि हम ईंहा चल जाई अउर न रह जाई, हमके बचा ल जेसे हम प्रदीप्त जीवन प्राप्त करी!"