1 दुष्ट लोग क अपराध ओकरे दिल के भीतर कहअला; परमेश्वर के डर ओकरे नजर में ना हव।(रोम 3:18) 2 उ अपने अधर्म के उजागर होवअ अउर घृणित ठहरअ के विषय अपने मन में चिकनी चुपड़ी बातन के विचारला। 3 उ सब क बातन बुराई अउर छल क हयन; उ बुद्धि अउर भलाई क काम करअ से हाथ उठईले हव। 4 उ अपने बिछौना पे पड़ल-पड़ल अनर्थ क कल्पना करला*; उ अपने कुमार्ग पे मजबूती से बनल रहला; बुराई से उ हाथ नाही उठावला। 5 हे यहोवा, तोहार करुणा स्वर्ग में हव, तोहार सच्चाई आकाशमण्डल तक पहुँचल हव। 6 तोहार धर्म ऊँचा पहाड़न के तरे हव, तोहार न्याय अथाह सागर के तरे हव; हे यहोवा, तू मनुष्य अउर पशु दुनो क रक्षा करअलअ। 7 हे परमेश्वर, तोहार करुणा कईसन अनमोल हव! मनुष्य तोहरे पंखन के नीचे शरण लेलअन। 8 उ तोहरे भवन के खाना के बहुतायत से तृप्त होइहन, अउर तू अपने सुख के नदी मे से ओनके पियईबअ। 9 काहे कि जीवन के सोता तोहरे ही लग्गे हव*; तोहरे रोशनी से हमने रोशनी पाईब। (यहू. 4:10, 14, प्रका. 21:6) 10 अपने जानअवालन पे करुणा करत रहा, अउर अपने धर्म क काम सीधा मनवालन में करत रहा! 11 अहंकारी हमरे पे लात उठावअ न पावंअ, अउर न दुष्ट अपने हाथ के बल से हमके भगावअ पावंअ। 12 उहाँ अनर्थकारी गिर पड़ल हयन; उ सब नीचे ढकेल दिहल गईलन, अउर फिर उठ न सकिहन।