1 हे यहोवा, जे हमरे संगे मुकदमा लड़अलन, ओनकरे संगे तू भी मुकद्दमा लड़ा; जे हमसे युद्ध करअला, ओनसे तू युद्ध करा। 2 ढाल अउर भाला लेके हमार मदद करअ बदे खड़ा होवा। 3 बर्छी के खींचा अउर हमार पीछा करअ वालन के सामने आके ओनके रोका; अउर हमसे कहा, की हम तोहार उद्धार हई । 4 जे हमरे प्राण क ग्राहक हव उ लज्जित अउर निरादर होव! जे हमरे हानी क कल्पना करअला, उ पीछे हटावल जांए अउर ओनकर मुँह काला होव! 5 उ हवा से उड़ जाए वाले भूसी क तरे होंव, अउर यहोवा क दूत उ सब के हाँकत जाए! 6 उ सब क रस्ता अनिहार अउर फिसलहा होव*, अउर यहोवा क दूत उ सब के खदेड़त जाए। 7 काहे कि अकारण उ सब हमरे बदे आपन जाल गड्ढा में बिछईलन; अकारण ही उ सब हमार प्राण लेवअ बदे गड्ढा खोदले हयन। 8 अचानक उ सब पे विपत्ति आ पड़अ! अउर जवन जाल उ सब बिछअईले हयन ओम्में उ खुदअ ही फँसअ; अउर ओहि विपत्ति में उ खुदअ पड़अ ! (रोम. 11:9,10, 1 थिस्स. 5:3) 9 लेकिन हम यहोवा के कारण अपने मन में मगन होईब; हम ओनके करल गयल उद्धार से हर्षित होइब। 10 हमार हड्डी-हड्डी कही, “हे यहोवा, तोहरे तुल्य के हव, जे दीन के बड़ा-बड़ा ताकतवरन से बचावअला, अउर लुटेरन से दीन दरिद्र लोगन क रक्षा करअला?" 11 अधर्मी गवाह खड़ा होवअलन; उ सब हमरे पे झूठा आरोप लगावअलन। 12 उ सब हमसे भलाई के बदले में बुराई करअलन, इहाँ तक की हमार प्राण ऊब जाला। 13 जब उ लोग रोगी रहलअन त हम टाट पहिनले रहे*, अउर उपवास कर-करके दुख उठावत रहे; हमके हमरे प्रार्थना क जवाब नाहीं मिलल। (अय्यूब 30:25, रोम 12:15) 14 हम अईसन भावना रखत रहे की माना उ हमार संगी वा भाई हयन; जईसे केहु माई बदे विलाप करत हो, वईसहीं हम शोक क पहिरावा पहिनले सिर झुकाके शोक करे। 15 लेकिन जब हम लँगड़ाए लगे तब उ लोग खुश होके इकठ्ठा भईलन, नीच लोग अउर जेके हम जानत भी ना रहे उ हमरे विरुद्ध इकठ्ठा भईलन; उ हमके लगातार फाड़त रहअलन; 16 आदर के बिना उ सब हमके ताना मारअलन; उ हमरे पे दाँत पीसअलन। (भज 37:12) 17 हे यहोवा, तू कब तक देखत रहबअ? ए विपत्ति से,जेम्मे उ सब हमके डलले हयन हमके छुड़ावा! जवान शेरन से हमारे प्राण के बचा लअ! 18 हम बड़ा सभा में तोहार धन्यवाद करब; बहुत लोगन के बीच हम तोहार स्तुति करब। 19 हमार झूठ बोलअ वाला दुश्मन हमरे विरुद्ध खुशी मनावअ न पावअ, जे अकारण हमार बैरी हव, उ आपस मे आँखन से इशारा करअ न पांवअ। (यूह15:25,भज69:4) 20 काहे कि उ लोग मेल क बात नांही बोललअलन, लेकिन देश में जे चुपचाप रहअला, ओनके विरुद्ध छल क कल्पना करअलन। 21 अउर उ सब हमरे विरुद्ध मुँह पसार के कहलन; "आहा, आहा, हमने अपने आँखन से देखले हई!" 22 हे यहोवा, तू त देखले हयअ; चुप मत रहा! हे प्रभु, हमसे दूर मत रहा! 23 उठा, हमरे न्याय के बदे जागा, हे हमार परमेश्वर, हे हमार प्रभु, हमार मुकद्दमा निपटावअ बदे आवा! 24 हे हमार परमेश्वर यहोवा, तू अपने धार्मिकता के अनुसार हमार न्याय चुकावा; अउर उ सब के हमरे विरुद्ध खुश होवअ मत द! 25 उ सब मन में न कहअ पावअ, “आहा! हमने क त इच्छा पूरा भयल!” उ सब ई न कहअ, “हमने ओके निगल गयल हई।" 26 जे हमरे नुकसान से खुश होला ओकर मुँह लाज के मारे एक संगे काला होवअ! जे हमरे विरुद्ध बड़ाई मारअलन* उ लज्जा अउर अनादर से ढँप जाएँ! 27 जे हमरे धर्म से खुश रहअला, उ जयजयकार अउर आनन्द करअ, अउर लगातार करत रहअ, यहोवा क बड़ाई होवअ, जे अपने दास के कुशल से खुश होला! 28 तब हमरे मुँह से तोहरे धर्म क चर्चा होई, अउर दिन भर तोहार स्तुति निकली।