पाठ 34

1 हम हर समय यहोवा के धन्य कहल करबला; ओनकर स्तुति हरदम हमरे मुख से हाेत रही। 2 हम यहोवा पर घमंड करब; नम्र लोग इ सुनके आनंदित होईहन। 3 हमरे संगे यहोवा क बड़ाई करा, अउर आवा हमने मिलके ओनके नाम क स्तुति करीं; 4 हम जब यहोवा क लग्गे गईली, तब ओन हमार सुन लेहअलन, अउर हमके पूरे तरीके से निर्भय कईलन। 5 जे ओनके ओरी दृष्टि कईलेस, उ ज्योति पईलेस; अउर ओनकर मुँह कभो काला न होवअ पायल। 6 ई दीन जन पुकरलन। तब यहोवा सुन लेहलन, अउर ओनके सब कष्टन से छुड़ा लेहलन। 7 यहोवा के डरवैयन के चारों तरफ ओनकर दूत छावनी कईले हुए उ सब के बचावलन। (इब्रा. 1:14, दान. 6:22) 8 चखके देखा* कि यहोवा कईसन भला हयन! का ही धन्य हयन उ मनुष्य जे ओनकार शरण लेला। (1 पतरस 2:3) के बा। 9 हे यहोवा क पवित्र लोगन, ओनकर भय माना, काहे कि ओनके डरवैयन के कउनों बात क घाटी न होई! 10 जवान शेरन के त घटी होला अउर उ भूखा भी रह जालन; लेकिन यहोवा के खोजियन के कउनों भली वस्तु क घटी न होई। 11 हे बच्चन, आवा हमार सुना, हम तोहके यहोवा क भय मानअ सिखाईबला। 12 उ कवन मनुष्य हव जे जीवन का इच्छा रखअला, अउर दीर्घायु चाहअला ताकि भलाई देखअ? 13 अपने जीभ के बुराई से रोक रखा, अउर अपने मुँह क चौकसी करा की ओसे छल क बात न निकलअ। (याकूब 1:26) 14 बुराई के छोड़ा अउर भलाई करा; मेल के खोजा अउर ओही क पीछा करा। (इब्रानियों 12:14) 15 यहोवा क नजर धर्मियन पे लगल रहअला, अउर ओनकर कान भी उ सब के दुहाई के ओरी लगल रहअला। (यूहन्ना 9:31) 16 यहोवा बुराई करअ वालन के विमुख रहअलन, ताकि उ सब क याद धरती पे से मिटा डालंअ। (1पत 3:10-12) 17 धर्मी दुहाई देलअन अउर यहोवा सुनअलन, अउर ओनके सब विपत्तियन से छुड़ावअलन 18 यहोवा टूटल मनवालन के करीब रहअलन*, अउर पिसे हुअन क उद्धार करअलन। 19 धर्मी पे बहुत सा विपत्ति पड़ला तअ, लेकिन यहोवा ओनके उ सब से मुक्त करअलन। (निती. 24:16, 2तीम. 3:11) 20 ओन ओकरे हड्डी-हड्डी क रक्षा करअलन; अउर ओम्मे से एक भी टूटअ ना पावला। (यूहन्ना 19:36) 21 दुष्ट अपने बुराई के जरिये मारल जाई; अउर धर्मी क दुश्मन दोषी ठहरिहन। 22 यहोवा अपने दासन क प्राण मोल लेके बचा लेलअन; अउर जेतना ओनकर शरणागत हयन ओन मे से केहु भी दोषी न ठहरी।