1 हम यहोवा क दुहाई देत, हम यहोवा से गिड़गिड़ात हई, 2 हम अपने दु:ख क बातन के ओनसे खुल के कहत हई, हम आपन परेशानी ओनकरे आगे उजागर करत हई। 3 जब हमार आत्मा हमरे अंदर से व्याकुल होत रहल। तब तू हमरे दशा के जानत रहलअ जऊने रस्ते से हम जाए वाला रहे वोही में उ लोग हमरे बदे फंदा लगईलन। 4 हम दहिने ओरी देखली, लेकिन केहू हमके ना देखत रहल। हमरे बदे शरण काही ना रहल न हमके केहु पुछत हव। 5 हे यहोवा, हम तोहार दुहाई देहले हई हम कहली, तू हमार शरण स्थान हयअ, हमरे जीते जी तू हमार भाग हयअ। 6 हमरे चिल्लाहट के ध्यान देके सुना,काहे कि हमार बड़ा दुर्दशा हो गयल हव! जे हमरे पीछे पड़ल हयन उ लोग से हमके बचा ला; काहे कि ऊलोग हमसे ज्यादा शक्तिशाली हयन। 7 हमके जेल से निकाला* कि हम तोहरे नाम क धन्यवाद करी! धर्मी लोग हमरे चारों ओरी अईहन; काहे कि तू हमार उपकार करबअ।