1 मूर्ख* अपने मन मे कहले हव, "कऊनो परमेश्वर हयन ही नाही।" उ सब बिगड़ गईलन,ओनहन घिनौना काम कइले हयन, कउनो सुकर्मी नाहीं। 2 यहोवा स्वर्ग में से मनुष्यन पर नजर कइलन कि देखंअ कि केहु बुद्धिमान, केहु यहोवा क खोजी हव की नाही। 3 उ सब क सब भटक गइलन, उ सब भ्रष्ट हो गइलन; केहु सुकर्मी नाही, एक भी नाही।(रोमी.3:10-11) 4 का कउनो अनर्थकारी के कुछो भी ज्ञान ना रहत, जवन हमरे लोगन के अइसे खा जालन जइसे रोटी, आऊर यहोवा का नाम नाही लेतन? 5 ऊंहा उ सब पे डर छा गयल, काहे कि परमेश्वर धर्मी लोगन के बीच मे निरन्तर रहअलन । 6 तू त दीन के योजना क हंसी उड़ावअल लेकिन यहोवा ओनकार शरणस्थान हयन। 7 भला होत कि इस्राएल क उद्धार सियोन से* प्रगट होत! जब यहोवा अपने प्रजा के गुलामी से वापस ले अईहन, तब याकूब मगन आऊर इस्राएल आनंदित होई।(भज 53:6, लूका 1:69)