पाठ 107

1 यहोवा क धन्यवाद करा, काहें कि ऊ भला हव; अऊर ओनकर दया हमेशा क हव 2 यहोवा क छुड़ावल लोग अइसहीं कहअ, जेके ऊ शत्रु के हाथ से दाम देके छुड़ा लेले हयन, 3 अऊर ओके देश-देश से, पूरब-पश्चिम, उत्तर अऊर दक्खिन से ईकट्ठा कइले हयन (भजन १०६:४७) 4 ऊ जंगल में मरुभूमि के राह पे भटकत रहलन, अऊर कऊनो बसल नगर ना पईलन ; 5 भूख अऊर प्यास के मारे, ऊ बेचैन हो गइलन. 6 तब ऊ संकट में यहोवा के दोहाई देहलन, अऊर ऊ ओनके सकेती से छुड़ईलन; 7 अऊर ओनके ठीक राह पर चलईलन, ताकि ऊ बसअ के खातिर कऊनो नगर में जा पहुंचअ 8 लोग यहोवा के दया के कारण, अऊर ऊ अचरज वाले काम के कारण, जवन ऊ मनुष्यन के खातिर करलन, ओनकर धन्यवाद करा. 9 काहें कि ऊ अभिलाषी जीव के संतुष्ट करलन, अऊर भूखन के उत्तम पदार्थ से तृप्त करलन. (लूका १:५३, यिर्मयाह ३१:२५) 10 जवन अंधियार अऊर मृत्यु के छाया में बइठल रहलन, अऊर दु;ख में पड़ल अऊर बेड़ीयन से जकड़ल रहलन, 11 एहीसे कि ऊ परमेश्वर के वचन के खिलाफ चललन, अऊर परमप्रधान के सम्मति के तुच्छ जनलन. 12 तब ऊ ओनके कष्ट से दबईलन; ऊ ठोकर खा के गिर पड़लन, अऊर ओनके कऊनो सहायक ना मिललन. 13 तब ऊ संकट में यहोवा क दुहाई देहलन, अऊर ऊ सकेती से ओनकर उद्धार कइलन; 14 ऊ ओनके अंधियारा अऊर मृत्यु के छाया में से निकाल लेहलन; अऊर ओनकरे बंधन के तोड़ देहलन. 15 लोग यहोवा के दया के कारण, अऊर ऊ अचरज वाले काम के कारण जवन ऊ मनुष्यन के खातिर करलन, ओनकर धन्यवाद करा 16 काहें कि ऊ पीतल के फाटक के तोड़ देहलन, अऊर लोहा के बेड़ी के टुकड़ा-टुकड़ा कर देहलन. 17 मूर्ख आपन कुचाल, अऊर अधर्म के कामन के कारण बहुत दु:खी होवलन . 18 ओनकर मन सब खाना से मिचलात हव, अऊर ऊ लोग मौत के फाटक तक पहुंच गयल हयन. 19 तब ऊ संकट में यहोवा के पुकारलन, अऊर ऊ संकट से ओनकर उद्धार करलन . 20 ऊ अपने वचन से ओनकर इलाज कइलन* अऊर जवन गड्ढा में ऊ लोग गिरल हयन, ओसे निकाललन. (भजन १४७:१५) 21 लोग यहोवा के दया के कारण आउर उ अचरज वाला काम के कारण जवन ऊ मनुष्य के खातिर करलन, ओनकर धन्यवाद करअ. 22 अऊर ऊ धन्यवाद-बलि चढ़ावअ, अऊर जयजयकार करत के, ओनकर कामन के बखान करअ 23 जवन लोग जहाज मे समुद्र पे चललन, अऊर महासागर पे हो के व्यापार करअलन; 24 ऊ यहोवा के काम के, अऊर उ अचरज वाला काम के जवन ऊ गहिरा समुद्र में करलन, देखलन 25 काहे कि ऊ आज्ञा देललन, तब तेज हवा उठ के लहर के उठावलन. 26 ऊ आकाश तक चढ़ जालन, फिर गहिराई में उतर जालन; अऊर क्लेश के मारे ओनके जी में जी ना रहला; 27 ऊ चक्कर खालन, अऊर नशा में धुत लोग जइसन लड़खड़ालन, अऊर ओनकर सब बुद्धि मारल जाला. 28 तब ऊ संकट में यहोवा के पुकार लगवलन, अऊर ऊ ओनके संकट से निकाललन. 29 ऊ आंधी के शांत कर देलन अऊर लहर शांत हो जाला. 30 तब ऊ लोग शांत होवअ से खुश होलन, अऊर ऊ ओनके मन चाहे बंदरगाह मे पहुंचा देलन. 31 लोग यहोवा के दया के कारण, अऊर उनकर अचरज वाला काम के खातिर जवन ऊ मनुष्य के खातिर करलन, ओनकर धन्यवाद करा. 32 अऊर सभा में ओनकर बड़ाई करअ, अऊर बुजुर्गन के बैठक में ओनकर स्तुति करअ 33 ऊ नदी के जंगल बना देलन, अऊर पानी के सोता क सूखा जमीन बना देलन 34 ऊ उपजाऊ जमीन के बंजर बना देलन, ई ऊहा के रहअ वाला लोग के दुष्टता के कारण होला. 35 ऊ जंगल के पानी के ताल, अऊर निर्जल देश के पानी के सोता बना देलन. 36 अऊर ऊहा ऊ भूखन लोग के बसावलन, ताकि ऊ लोग बसअ के खातिर शहर तैयार करअ. 37 अऊर खेती करअ, अऊर दाख क बारी लगावअ, अऊर भांति-भांति क फल उपजा लअ 38 अऊर ऊ ओनके अइसन आशीष देलन कि ऊ बहुत बढ़ जालन, अऊर ओकरे पशुअन के भी ऊ घटअ ना देलन. 39 फिर बिपत्ति अऊर शोक के कारण, ऊ घटत अऊर दब जालन. 40 अऊर ऊ हाकिमन के अपमान से लादके राह बिना जंगल में भटकावलन; 41 ऊ गरीबन के दुःख से छुड़ा के ऊंचा पे राखलन, अऊर ओनके भेड़न के झुंड जइसन परिवार देलन. 42 सीधा लोग देख के आनंदित होलन; अऊर सब कुटिल लोग आपन मुंह बंद करलन. 43 जे केहू बुद्धिमान होई, ऊ ए बातन पे ध्यान करी; अऊर यहोवा के करुणा के कामन पे ध्यान करीहन.