बाब 5 7 एक ही वाक़े'आ है। 'ईसा एक पहाड़ पर चढ़कर अपने शागिर्दों को ता'लीम देने के लिए बैठ गया।
"'ईसा ने कहना शुरू'किया"।
"उन्हें"या'नी शागिर्दों को।
"वे जो समझते थे कि उन्हें ख़ुदा की ज़रुरत है।"
जो ग़म करते थे क्योंकि(1)दुनिया गुनाहगार थी या(2)उनके अपने गुनाह थे या(3)किसी की मौत। जब तक आपकी ज़बान में ग़म के वजह की ज़रुरत नहीं तब तक वजह साफ़ न करें।
इख़्तियारी तर्जुमा"ख़ुदा उन्हें इत्मीनान देगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है,यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू'हुआ था ।
"जितनी उन्हें खाना पानी की चाहत थी उतनी ही रास्तबाज़ी ज़िन्दगी की ज़रूरत थी।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"ख़ुदा उन्हें पूरा करेगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
"जिन इन्सानों के दिल साफ़ हैं"।
"उन्हें ख़ुदा के साथ रहने की इजाज़त दी जाएगी"या"ख़ुदा उनके साथ रहने की इजाज़त देगा"।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
ये वे लोग हैं जो इन्सानों को आपस में मेल मिलाप से रहना सिखाते हैं।
ये ख़ुदा की अपनी औलाद हैं(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
इख़्तियारी तर्जुमा"जिनके साथ इन्सान ग़ैर मुनासिब सुलूक़ करता है।"
"क्योंकि वे ख़ुदा की मर्ज़ी पर चलते हैं।"
"ख़ुदा उन्हें आसमान कि बादशाही में रहने देगा"। वे आसमान कि बादशाही के मालिक तो नहीं हैं लेकिन ख़ुदा उन्हें अपनी मौजूदगी में रहने का इख़्तियार देता है।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
"जो तुम्हारे बारे में सच नहीं लेकिन मेरी पैरवी की वजह"या मुझमें ईमान करने के बजाय तुम्हारा कोई इल्ज़ाम नहीं है।
"ख़ुशी और मुसर्रत"का मतलब तक़रीबन एक ही है।'ईसा चाहता था कि उसकी पैरवी करने वाले ख़ुश ही नहीं बल्कि बहत ख़ुश हों।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hendiadys)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
"तुम ज़मीन के रहनेवालो के लिए नमक की तरह हो"। या जैसा नमक खाने में वैसा ही तुम दुनिया में हो"। इसके मतलब हो सकते हैं(1)ठीक वैसे ही जैसे नमक खाने को मज़ेदार बनाता है,तुम्हें दुनिया में लोगों पर असर करना है कि वे भले इन्सान हों"या(2)जिस तरह नमक खाने को महफ़ूज़ करता है वैसे ही तुम भी इन्सान को ख़राब होने से बचाए रखो"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
इसका मतलब है"अगर नमक की नमकीन करने की सलाहियत चली जाए" (जैसा यू.डी.बी.में है)या(2)अगर नमक अपने मज़ा से महरूम हो जाए"।
"वह क़ाबिल ए इस्ते'माल कैसे किया जाए"?या"उसे क़ाबिल ए इस्ते'माल बनाने का कोई तरीक़ा नहीं" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)
"वह सिर्फ़ एक काम का रह जाता है कि सड़क पर फेंक दिया जाए जहाँ लोग चलते हैं"।
"तुम दुनिया में लोगों के लिए रोशनी की तरह हो"।
"पहाड़ पर बसे शहर के चराग़ रात में छिप नहीं सकते है"। या"पहाड़ पर बसे शहर के चराग़ सब देख सकते हैं"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-explicit और /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था।
"इन्सान चराग़ नहीं जलाते।"
यह एक छोटी कटोरी है जिसमें जैतून के तेल में एक बत्ती डूबी हुई रहती है। ख़ास बात तो यह है कि वह रोशनी देता है।
"चराग़ टोकरी के नीचे रखें"यह एक कहावत है कि रोशनी पैदा करके उसे छिपाएँ कि लोग चराग़ की रोशनी न देख पाएँ।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था।
"छोटे से छोटा लिखित हरूफ या हरूफ का"छोटे से छोटा अजा"या वे कानून जो बेकार ज़ाहिर होते हैं"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
"वह सब जो ख़ुदा ने बनाया है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-merism)
"शरी'अत में जो कुछ लिखा था वह सब ख़ुदा ने कर दिया है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़ि'या MAT 5:1 में शुरू'' हुआ था।
"जो एक भी हुक्म तोड़े चाहे वह अहमियत में सबसे कम क्यों न हो"।
"ख़ुदा भी कहेगा कि वह सबसे कम अहमियत के हैं।"
"अहमियत में सबसे कम"
ख़ुदा का कोई हुक्म सिखाएगा।
बहुत ख़ास
ये लफ़्ज़ जमा'हैं।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाकि'या MAT 5:1 में शुरू'' हुआ था
यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है या'नी'ईसा जो कह रहा है वह ख़ुदा की हुक्मों के बराबर ख़ास है। आख़िर इस जुमले को इस तरह तर्जुमा करें कि यह ज़ोर से उभर आए।
इख़्तियारी तर्जुमा"ख़ुदा उन्हें इत्मीनान देगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
यह लफ़्ज़ बहुत ईमानदारों के लिए है,न कि भाई या पड़ोसी के लिए है।
यह उन लोगों के लिए बे'इज़्ज़ती के लफ़्ज़ हैं जो अच्छी तरह से सोच नहीं सकते"निकम्मा"लफ़्ज़ बेवक़ूफ़ के नज़दीक है जबकि"बेवक़ूफ़"ख़ुदा की नाफ़रमनी का ख़याल है।
यह मक़ामी जमा'त है,न कि यरुशलीम की बड़ी जमा'त।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
'ईसा सब लोगों से कह रहा है कि ज़ाती तौर पर उनका क्या होगा।"तू"और"तेरा"सब लफ़्ज़ वाहिद में हैं लेकिन आपकी ज़बान में इन्हें जमा'में तर्जुमा करने की ज़रूरत होगी।
"हदिया पेश करे"या"हदिया लेकर आएं"।
"क़ुर्बान गाह के नज़दीक खड़ा हो और तुझे याद आये।"
"अगर किसी को तेरे ज़रिए'किया गया नुक़सान याद हो"।
"अपना हदिया पेश करने से पहले अपने भाई से सुलह कर।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)
"तुम्हारे आलमेदिन ने तुमसे कहा है,पहले ज़माने के लोगों से कहा गया था,झूठी क़सम न खाना, 'ईसा यहाँ तनासुब जुमला काम में ले रहा है कि साफ़ कर दे कि वह न तो ख़ुदा न ही ख़ुदा के कलाम से मुत्तफ़िक़ है। इसके बदले वह अपने साम'ईंन'को कह रहा है कि जो उनका नहीं उसे काम में लेने के लिए इन्सानों को अपने लफ़्ज़ो पर ईमान दिलाएं।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
इस लफ़्ज़ का मतलब है काम कि सुरत देना या कुछ करना।
यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है,या'नी'ईसा जो कह रहा है वह ख़ुदा के हुक्म के बराबर है। इस जुमले'को अपनी ज़बान में इस तरह तर्जुमा करें कि उसमें यह ज़ोर उभर आए। जैसा MAT 5:22 में है।
इस मिसाल से ज़ाहिर होता है कि किसी'औरत पर गलत निगाह डालने वाला मर्द उतना ही मुजरिम है जितना कि सही में ज़िना करने वाला।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
दिल में दूसरी'औरत का लालच करने वाला।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
बाएँ हाथ या बाईं आँख के बदले में दाहिनी आँख और हाथ ज़्यादा ख़ास है। आपको इसका तर्जुमा करना होगा"दाहिना"या"सबसे अच्छा"या"सिर्फ़ वाहिद" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
"अगर तू जो देखता है,वह तुझे ठोकर खिलाए"या"अगर तू जो देखता है उसके वजह तू गुनाह करना चाहे"। ठोकर खाना एक मिसाल है जो"गुनाह करने के लिए काम में लिया जाता है।'ईसा यहाँ तंज़िया तौर पर इस्ते'माल कर रहा है क्योंकि इन्सान ठोकर खाने से बचने के लिए आंखें काम में लेता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-irony
"उसे ज़ोर देकर निकाल दे"या"उसे हालाक कर दे" (देखें यू.डी.बी.)अगर दाहिनी आँख ख़ास करके इज़हार की जाए तो आपको तर्जुमा करना होगा, "उसे निकाल दे",अगर"आँखे"लफ़्ज़ काम में लिया गया है तो आपको तर्जुमा करना होगा, "उन्हें निकाल दे"।(देखें यू.डी.बी.)(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hyperbole.)
"उससे मख़लसी पा ले"।
"तुझे अपनी बदन का एक आ'जा'हलाक होने देना होगा"।
आख़िरकार इस्ते'माल पूरी सख्शियत के कामों से हाथ का रिश्ता बताने के लिए हैं।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
ख़ुदा ने"कहा"था(देखें यू.डी.बी.) 'ईसा यहाँ बेआवाज़ जुमला काम में ले रहा है,वह साफ़ करना चाहता है कि न तो ख़ुदा से और न ही ख़ुदा के कलाम से मुत्तफ़िक़ है,इसकी बदले वह कह रहा है कि तलाक कि वजह मुनासिब है तो वह दुरुस्त है। तलाक देना नाइंसाफ़ी है चाहे मर्द ने तहरीर के ज़रिए'दिया हो।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive.)
यह तलाक के लिए तनासुब है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-euphemism)
यह एक हुक्म है, "उसे देना है"।
अगर इशारा दे रहा है कि वह"जो कहा गया है"उससे अलग कुछ कहना चाहता है। यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है क्योंकि वह दा'वा करता है कि वह उस से ज़्यादा ख़ास है जिसने पहले"कहा"है।
जो मर्द औरत को ग़ैर मुनासिब तलाक देता है,वह"उससे जिना करवाता है" (यहाँ जिना के लिए वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:27).में काम में लिए हैं। बहुत रीती रिवाज में उसके लिए दूसरे मर्द से शादी करना आम बात है लेकिन अगर तलाक ग़ैर मुनासिब है तो ऐसा दोबारा शादी जिना है।(देखें यू.डी.बी.)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
कहा गया या इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा MAT 5:31 में किया गया है।
इसका मतलब है(1)ख़ुदा और इन्सानों से कहें कि आप वही करेंगे जो ख़ुदा चाहता है(देखें:यू.डी.बी.)या(2)इन्सानों से कहें कि ख़ुदा जानता है कि आपने जो देखा है उसके बारे में आप जो कह रहे हैं वह सच है।
लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ,इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा आपने MAT 5:32 में किया है।
अगर आपकी ज़बान में हुक्म का जमा'है तो उसे यहाँ काम में लें।"तू झूठी क़सम न खाना" (पद33)इससे लोगों को क़सम खाने की ईजाज़त है लेकिन झूठी क़सम की नहीं।"कभी क़सम न खाना"किसी भी क़सम कि मुख़ालिफ़त करता है।
इसका तर्जुमा वैसा करें जैसा आयत33में किया है।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
35]] में 'ईसा ने अपने साम'ईन से कहा है कि ख़ुदा का तख़्त, पैरों की चौकी, उसके रहने कि जगह उनका अपना नहीं कि उसकी क़सम खाएं। वह तो यहाँ तक कहता है कि हमारे सिर भी हमारे नहीं कि उनकी क़सम खाएं।
इसके तर्जुमा में वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:34 में काम में लिया है।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:33 में किया है।
यहाँ"तुम"वाहिद में है।
उन्हें बदला लेने की इजाज़त थी लेकिन नुक़सान की हद तक ही।
इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:32 में किया है।
"बुरा इन्सान"या"तुम्हें नुक़सान पहुंचाने वाला"।(यू.डी.बी.)
यह सब जमा'में हैं।
'ईसा की तहज़ीब?में किसी को थप्पड़ मारना नफ़रत अंगेज था। जिस तरह आँख और हाथ तशबीह दी गई है(MAT 5:29 30]])उसी तरह दाहिना गाल मिसाल की तौर पर ज़्यादा ख़ास गाल है और उस पर थप्पड़ मारना इन्तेहाई मुमकिन तौहीन था।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
काम लफ़्ज़ से साफ़ होता है कि थप्पड़ हथेली के पीछे वाले हिस्सा से मारा गया है।
"उसे दूसरे गाल पर भी मारने दे"।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।
कुरता ऊपरी जिस्म पर पहना जाता था जैसे कमीज या बनियान। दोहर इन दोनों में ज़्यादा कीमती थी जो कुर्ते के ऊपर पहना जाता था कि जिस्म गर्म रहे,रात में गर्मी के लिए भी इसका इस्तिमाल कम्बल के तौर पर किया जाता था।
"उस इन्सान को दे दे"।
जो कोई कोई भी इन्सान
कोस भर एक हज़ार कदम,रोमी फ़ौजी को कानूनी इख़्तियार हासिल था कि किसी को भी अपना समान उठाकर एक कोस चलने के लिए मजबूर कर सकता था।
वह जो किसी को समान उठाकर चलने के लिए मजबूर करता है ।
"एक मील चलने के लिए उसने तुझे मजबूर किया लेकिन एक मील और चला जा"।
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 शुरू' में हुई थी।
इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:33 में किया है।
लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ,इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा आपने MAT 5:32 में किया है।
"तुम्हारा किरदार अपने बाप के जैसा होगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)
'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 शुरू' हुआ था ।
यह एक आम लफ़्ज़ है जो साम'ईन के फ़ायदा की दिली ख़्वाहिश ज़ाहिर करता है।