Matthew 5

Matthew 5:1

बाब 5 7 एक ही वाक़े'आ है। 'ईसा एक पहाड़ पर चढ़कर अपने शागिर्दों को ता'लीम देने के लिए बैठ गया।

अपना मुँह खोलकर।

"'ईसा ने कहना शुरू'किया"।

उन्हें ता'लीम देने लगा।

"उन्हें"या'नी शागिर्दों को।

दिल के दीन।

"वे जो समझते थे कि उन्हें ख़ुदा की ज़रुरत है।"

जो लोग ग़म करते हैं

जो ग़म करते थे क्योंकि(1)दुनिया गुनाहगार थी या(2)उनके अपने गुनाह थे या(3)किसी की मौत। जब तक आपकी ज़बान में ग़म के वजह की ज़रुरत नहीं तब तक वजह साफ़ न करें।

वे सुकून पाएंगे।

इख़्तियारी तर्जुमा"ख़ुदा उन्हें इत्मीनान देगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

Matthew 5:5

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है,यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू'हुआ था ।

मज़हब के भूखे और प्यासे।

"जितनी उन्हें खाना पानी की चाहत थी उतनी ही रास्तबाज़ी ज़िन्दगी की ज़रूरत थी।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

वे आसूदा किए जायेंगे।

"ख़ुदा उन्हें पूरा करेगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

जिनके दिल साफ़ हैं।

"जिन इन्सानों के दिल साफ़ हैं"।

वे ख़ुदा को देखेंगे।

"उन्हें ख़ुदा के साथ रहने की इजाज़त दी जाएगी"या"ख़ुदा उनके साथ रहने की इजाज़त देगा"।

Matthew 5:9

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

मेल कराने वाले।

ये वे लोग हैं जो इन्सानों को आपस में मेल मिलाप से रहना सिखाते हैं।

ख़ुदा के बेटे।

ये ख़ुदा की अपनी औलाद हैं(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

जो सताए जाते हैं।

इख़्तियारी तर्जुमा"जिनके साथ इन्सान ग़ैर मुनासिब सुलूक़ करता है।"

मज़हब कि वजह

"क्योंकि वे ख़ुदा की मर्ज़ी पर चलते हैं।"

आसमान कि बादशाही उन्हीं की है।

"ख़ुदा उन्हें आसमान कि बादशाही में रहने देगा"। वे आसमान कि बादशाही के मालिक तो नहीं हैं लेकिन ख़ुदा उन्हें अपनी मौजूदगी में रहने का इख़्तियार देता है।

Matthew 5:11

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

तुम्हारे ख़िलाफ़ में सब तरह की झूठी बातें कहें।

"जो तुम्हारे बारे में सच नहीं लेकिन मेरी पैरवी की वजह"या मुझमें ईमान करने के बजाय तुम्हारा कोई इल्ज़ाम नहीं है।

ख़ुशी और मुसर्रत होना।

"ख़ुशी और मुसर्रत"का मतलब तक़रीबन एक ही है।'ईसा चाहता था कि उसकी पैरवी करने वाले ख़ुश ही नहीं बल्कि बहत ख़ुश हों।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hendiadys)

Matthew 5:13

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

तुम ज़मीन के नमक हो।

"तुम ज़मीन के रहनेवालो के लिए नमक की तरह हो"। या जैसा नमक खाने में वैसा ही तुम दुनिया में हो"। इसके मतलब हो सकते हैं(1)ठीक वैसे ही जैसे नमक खाने को मज़ेदार बनाता है,तुम्हें दुनिया में लोगों पर असर करना है कि वे भले इन्सान हों"या(2)जिस तरह नमक खाने को महफ़ूज़ करता है वैसे ही तुम भी इन्सान को ख़राब होने से बचाए रखो"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

अगर नमक कि मज़ा बिगड़ जाए।

इसका मतलब है"अगर नमक की नमकीन करने की सलाहियत चली जाए" (जैसा यू.डी.बी.में है)या(2)अगर नमक अपने मज़ा से महरूम हो जाए"।

वह फिर किस चीज़ से नमकीन हो सकता है?

"वह क़ाबिल ए इस्ते'माल कैसे किया जाए"?या"उसे क़ाबिल ए इस्ते'माल बनाने का कोई तरीक़ा नहीं" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

बाहर फेंका जाए और इन्सानों के पैरों तले रौंधा जाए।

"वह सिर्फ़ एक काम का रह जाता है कि सड़क पर फेंक दिया जाए जहाँ लोग चलते हैं"।

तुम दुनिया की रोशनी हो।

"तुम दुनिया में लोगों के लिए रोशनी की तरह हो"।

जो शहर पहाड़ पर बसा है वह छिप नहीं सकता।

"पहाड़ पर बसे शहर के चराग़ रात में छिप नहीं सकते है"। या"पहाड़ पर बसे शहर के चराग़ सब देख सकते हैं"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-explicit और /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

Matthew 5:15

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था।

नाही इन्सान चिराग़ जलाते।

"इन्सान चराग़ नहीं जलाते।"

चिराग़

यह एक छोटी कटोरी है जिसमें जैतून के तेल में एक बत्ती डूबी हुई रहती है। ख़ास बात तो यह है कि वह रोशनी देता है।

टोकरी के नीचे नहीं रखते।

"चराग़ टोकरी के नीचे रखें"यह एक कहावत है कि रोशनी पैदा करके उसे छिपाएँ कि लोग चराग़ की रोशनी न देख पाएँ।

Matthew 5:17

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़'या MAT 5:1 में शुरू' हुआ था।

एक ज़बर या एक नुक़्ता।

"छोटे से छोटा लिखित हरूफ या हरूफ का"छोटे से छोटा अजा"या वे कानून जो बेकार ज़ाहिर होते हैं"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

आसमान और ज़मीन

"वह सब जो ख़ुदा ने बनाया है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-merism)

बिना पूरा हुए नहीं टलेगा।

"शरी'अत में जो कुछ लिखा था वह सब ख़ुदा ने कर दिया है"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

Matthew 5:19

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़ि'या MAT 5:1 में शुरू'' हुआ था।

जो कोई इन छोटी से छोटी हुक्म में से किसी एक को तोड़े।

"जो एक भी हुक्म तोड़े चाहे वह अहमियत में सबसे कम क्यों न हो"।

सबसे छोटा कहलाएगा।

"ख़ुदा भी कहेगा कि वह सबसे कम अहमियत के हैं।"

सबसे छोटा

"अहमियत में सबसे कम"

उन्हें सिखाएगा।

ख़ुदा का कोई हुक्म सिखाएगा।

बड़ा

बहुत ख़ास

तुम....तुम्हारी...तुम्हें

ये लफ़्ज़ जमा'हैं।

Matthew 5:21

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाकि'या MAT 5:1 में शुरू'' हुआ था

'ईसा लोगों के भीड़ से बातें कर रहा है कि उनके साथ ज़ाती तौर पर क्या होगा, "तुम सुन चुके हो", "मैं तुमसे कहता हूँ" ये जुमले भीड़ से कहे गए हैं आख़िर जमा' में हैं, "क़त्ल न करना" एक कलाम है लेकिन आप इसे जमा' में तर्जुमा कर सकते हैं।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है या'नी'ईसा जो कह रहा है वह ख़ुदा की हुक्मों के बराबर ख़ास है। आख़िर इस जुमले को इस तरह तर्जुमा करें कि यह ज़ोर से उभर आए।

क़त्ल

इख़्तियारी तर्जुमा"ख़ुदा उन्हें इत्मीनान देगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

भाई

यह लफ़्ज़ बहुत ईमानदारों के लिए है,न कि भाई या पड़ोसी के लिए है।

निकम्मा...बेवकूफ़

यह उन लोगों के लिए बे'इज़्ज़ती के लफ़्ज़ हैं जो अच्छी तरह से सोच नहीं सकते"निकम्मा"लफ़्ज़ बेवक़ूफ़ के नज़दीक है जबकि"बेवक़ूफ़"ख़ुदा की नाफ़रमनी का ख़याल है।

कचहरी

यह मक़ामी जमा'त है,न कि यरुशलीम की बड़ी जमा'त।

Matthew 5:23

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

तू

'ईसा सब लोगों से कह रहा है कि ज़ाती तौर पर उनका क्या होगा।"तू"और"तेरा"सब लफ़्ज़ वाहिद में हैं लेकिन आपकी ज़बान में इन्हें जमा'में तर्जुमा करने की ज़रूरत होगी।

अपनी हदिया क़ुर्बनागाह पर लाएं।

"हदिया पेश करे"या"हदिया लेकर आएं"।

तू याद करे

"क़ुर्बान गाह के नज़दीक खड़ा हो और तुझे याद आये।"

तेरे भाई के दिल में तेरे लिए कुछ मुखालफ़त है।

"अगर किसी को तेरे ज़रिए'किया गया नुक़सान याद हो"।

पहले अपने भाई से मेल मिलाप कर ले।

"अपना हदिया पेश करने से पहले अपने भाई से सुलह कर।" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

Matthew 5:25

तुम सुन चुके हो।

"तुम्हारे आलमेदिन ने तुमसे कहा है,पहले ज़माने के लोगों से कहा गया था,झूठी क़सम न खाना, 'ईसा यहाँ तनासुब जुमला काम में ले रहा है कि साफ़ कर दे कि वह न तो ख़ुदा न ही ख़ुदा के कलाम से मुत्तफ़िक़ है। इसके बदले वह अपने साम'ईंन'को कह रहा है कि जो उनका नहीं उसे काम में लेने के लिए इन्सानों को अपने लफ़्ज़ो पर ईमान दिलाएं।

Matthew 5:27

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम सुन चुके हो" और "मैं तुम से यह कहता हूँ", जमा' में हैं। "न करना" वाहिद में है लेकिन आपको इसका तर्जुमा जमा' में करने की ज़रूरत होगी।

करना

इस लफ़्ज़ का मतलब है काम कि सुरत देना या कुछ करना।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है,या'नी'ईसा जो कह रहा है वह ख़ुदा के हुक्म के बराबर है। इस जुमले'को अपनी ज़बान में इस तरह तर्जुमा करें कि उसमें यह ज़ोर उभर आए। जैसा MAT 5:22 में है।

जो कोई किसी'औरत पर ग़लत डाले वह अपने दिल में उससे ज़िना कर चुका है।

इस मिसाल से ज़ाहिर होता है कि किसी'औरत पर गलत निगाह डालने वाला मर्द उतना ही मुजरिम है जितना कि सही में ज़िना करने वाला।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)

'औरत पर ग़लत नज़र डाले

दिल में दूसरी'औरत का लालच करने वाला।

Matthew 5:29

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि सख्शी तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है, "तुम" और "तू" के सब लफ़्ज़ वाहिद हैं लेकिन आपकी ज़बान में उनका तर्जुमा जमा' में करने की ज़रूरत हो सकती है।

दाहिनी आँख....दाहिना हाथ।

बाएँ हाथ या बाईं आँख के बदले में दाहिनी आँख और हाथ ज़्यादा ख़ास है। आपको इसका तर्जुमा करना होगा"दाहिना"या"सबसे अच्छा"या"सिर्फ़ वाहिद" (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)

अगर तेरी दाहिनी आँख तुझे ठोकर खिलाए।

"अगर तू जो देखता है,वह तुझे ठोकर खिलाए"या"अगर तू जो देखता है उसके वजह तू गुनाह करना चाहे"। ठोकर खाना एक मिसाल है जो"गुनाह करने के लिए काम में लिया जाता है।'ईसा यहाँ तंज़िया तौर पर इस्ते'माल कर रहा है क्योंकि इन्सान ठोकर खाने से बचने के लिए आंखें काम में लेता है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-irony

उसे निकालकर फेंक दे।

"उसे ज़ोर देकर निकाल दे"या"उसे हालाक कर दे" (देखें यू.डी.बी.)अगर दाहिनी आँख ख़ास करके इज़हार की जाए तो आपको तर्जुमा करना होगा, "उसे निकाल दे",अगर"आँखे"लफ़्ज़ काम में लिया गया है तो आपको तर्जुमा करना होगा, "उन्हें निकाल दे"।(देखें यू.डी.बी.)(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hyperbole.)

निकाल कर फेंक दे

"उससे मख़लसी पा ले"।

तेरे'अज़ा में से एक हलाक हो जाए।

"तुझे अपनी बदन का एक आ'जा'हलाक होने देना होगा"।

अगर तेरा दाहिना हाथ।

आख़िरकार इस्ते'माल पूरी सख्शियत के कामों से हाथ का रिश्ता बताने के लिए हैं।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metonymy)

Matthew 5:31

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

यह भी कहा गया था।

ख़ुदा ने"कहा"था(देखें यू.डी.बी.) 'ईसा यहाँ बेआवाज़ जुमला काम में ले रहा है,वह साफ़ करना चाहता है कि न तो ख़ुदा से और न ही ख़ुदा के कलाम से मुत्तफ़िक़ है,इसकी बदले वह कह रहा है कि तलाक कि वजह मुनासिब है तो वह दुरुस्त है। तलाक देना नाइंसाफ़ी है चाहे मर्द ने तहरीर के ज़रिए'दिया हो।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive.)

वह अपनी बिवी को तलाक दे दे।

यह तलाक के लिए तनासुब है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-euphemism)

उसे देने दो।

यह एक हुक्म है, "उसे देना है"।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

अगर इशारा दे रहा है कि वह"जो कहा गया है"उससे अलग कुछ कहना चाहता है। यहाँ"मैं"पर ज़ोर दिया गया है क्योंकि वह दा'वा करता है कि वह उस से ज़्यादा ख़ास है जिसने पहले"कहा"है।

उससे ज़िना करवाता है।

जो मर्द औरत को ग़ैर मुनासिब तलाक देता है,वह"उससे जिना करवाता है" (यहाँ जिना के लिए वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:27).में काम में लिए हैं। बहुत रीती रिवाज में उसके लिए दूसरे मर्द से शादी करना आम बात है लेकिन अगर तलाक ग़ैर मुनासिब है तो ऐसा दोबारा शादी जिना है।(देखें यू.डी.बी.)

Matthew 5:33

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा लोगो से बातें कर रहा है कि जाती तौर से उनका क्या हो सकता है। "तुम सुन चुके हो" में "तुम" और "मैं तुम से यह कहता हूँ" में "मैं" जमा' हैं।

तुम सुन चुके हो।"तुम्हारे आलमेदिन ने तुमसे कहा है,पहले ज़माने के लोगों से कहा गया था,झूठी क़सम न खाना, 'ईसा यहाँ तनासुब जुमला काम में ले रहा है कि साफ़ कर दे कि वह न तो ख़ुदा न ही ख़ुदा के कलाम से मुत्तफ़िक़ है। इसके बदले वह अपने साम'ईंन'को कह रहा है कि जो उनका नहीं उसे काम में लेने के लिए इन्सानों को अपने लफ़्ज़ो पर ईमान दिलाएं।

कहा गया

कहा गया या इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा MAT 5:31 में किया गया है।

क़सम

इसका मतलब है(1)ख़ुदा और इन्सानों से कहें कि आप वही करेंगे जो ख़ुदा चाहता है(देखें:यू.डी.बी.)या(2)इन्सानों से कहें कि ख़ुदा जानता है कि आपने जो देखा है उसके बारे में आप जो कह रहे हैं वह सच है।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ,इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा आपने MAT 5:32 में किया है।

कभी क़सम न खाना न तो आसमान की क्योंकि वह ख़ुदा का तख़्त है,न ज़मीन की क्योंकि वह उसके पाँवों की चौकी है...न यरूशलेम की क्योंकि वह बादशाह का शहर है। ISA 66:1 और भ. PSA 48:2 से लिया गया यह मिसाल ख़ुदा के लिए है कि वह"बड़ा बादशाह"है जिस तरह'ईसा के लोग नहीं सोच सकते कि दुनियावी बादशाह का ख़ूबसूरत तख़्त या उसके पैरों की चौकी या उसके रहने वाले शहर को अपना नहीं सोच सकते कि उसके लफ़्ज़ो को ख़ास बनाए,लिहाजा उन्हें आसमान या ज़मीन या यारुशलीम की क़सम खाकर अपने लफ़्ज़ो को भरोसा के लायक बनाएं।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)]]

कभी क़सम न खाना।

अगर आपकी ज़बान में हुक्म का जमा'है तो उसे यहाँ काम में लें।"तू झूठी क़सम न खाना" (पद33)इससे लोगों को क़सम खाने की ईजाज़त है लेकिन झूठी क़सम की नहीं।"कभी क़सम न खाना"किसी भी क़सम कि मुख़ालिफ़त करता है।

क़सम न खाना।

इसका तर्जुमा वैसा करें जैसा आयत33में किया है।

Matthew 5:36

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। यहाँ "तू" का इस्तिमाल वाहिद में है लेकिन आपको इसका तर्जुमा जमा' में करने की ज़रूरत हो सकती है, "तुम्हारी बात" में "तुम्हारी" लफ़्ज़ जमा' है।

MAT 5:34

35]] में 'ईसा ने अपने साम'ईन से कहा है कि ख़ुदा का तख़्त, पैरों की चौकी, उसके रहने कि जगह उनका अपना नहीं कि उसकी क़सम खाएं। वह तो यहाँ तक कहता है कि हमारे सिर भी हमारे नहीं कि उनकी क़सम खाएं।

क़सम।

इसके तर्जुमा में वही लफ़्ज़ काम में ले जो MAT 5:34 में काम में लिया है।

तुम्हारी बात ‘हाँ’ की ‘हाँ’ या ‘नहीं’ की ‘नहीं’ हो।"अगर तुम हाँ कहना चाहते हो तो"हाँ"कहो और अगर नहीं कहना चाहते हो तो"नहीं"कहो।

Matthew 5:38

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनका क्या हो सकता है।

तुम सुन चुके हो कि कहा गया था।

इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:33 में किया है।

तुम सुन चुके हो।

यहाँ"तुम"वाहिद में है।

आँख के बदले आँख और दाँत के बदले दाँत।

उन्हें बदला लेने की इजाज़त थी लेकिन नुक़सान की हद तक ही।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:32 में किया है।

वो जो बुरा है

"बुरा इन्सान"या"तुम्हें नुक़सान पहुंचाने वाला"।(यू.डी.बी.)

जो तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे।

यह सब जमा'में हैं।

तेरे दाहिने गाल पर थप्पड़ मारे।

'ईसा की तहज़ीब?में किसी को थप्पड़ मारना नफ़रत अंगेज था। जिस तरह आँख और हाथ तशबीह दी गई है(MAT 5:29 30]])उसी तरह दाहिना गाल मिसाल की तौर पर ज़्यादा ख़ास गाल है और उस पर थप्पड़ मारना इन्तेहाई मुमकिन तौहीन था।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

थप्पड़ मारे।

काम लफ़्ज़ से साफ़ होता है कि थप्पड़ हथेली के पीछे वाले हिस्सा से मारा गया है।

उसकी तरफ़ दूसरा भी फेर दे।

"उसे दूसरे गाल पर भी मारने दे"।

Matthew 5:40

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनका क्या हो सकता है। "तुम" तुझ, "तेरे" वगैरह सब वाहिद हैं जैसे "दे" "जा" "मुँह न मोड़" लेकिन आपको इनका तर्जुमा जमा' में करना होगा।

कुरता...दोहर

कुरता ऊपरी जिस्म पर पहना जाता था जैसे कमीज या बनियान। दोहर इन दोनों में ज़्यादा कीमती थी जो कुर्ते के ऊपर पहना जाता था कि जिस्म गर्म रहे,रात में गर्मी के लिए भी इसका इस्तिमाल कम्बल के तौर पर किया जाता था।

ले लेने दे।

"उस इन्सान को दे दे"।

जो कोई

जो कोई कोई भी इन्सान

कोस भर

कोस भर एक हज़ार कदम,रोमी फ़ौजी को कानूनी इख़्तियार हासिल था कि किसी को भी अपना समान उठाकर एक कोस चलने के लिए मजबूर कर सकता था।

उसके साथ

वह जो किसी को समान उठाकर चलने के लिए मजबूर करता है ।

दो कोस चला था।

"एक मील चलने के लिए उसने तुझे मजबूर किया लेकिन एक मील और चला जा"।

Matthew 5:43

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 शुरू' में हुई थी।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि उनके साथ क्या हो सकता है। "अपने पड़ोसी से मुहब्बत रखना और अपने दुश्मन से दुश्मनी" यह वाहिद में है लेकिन आपको इसका तर्जुमा जमा' में करना होगा। "तुम" के सब मिसाल और हुक्में "मुहब्बत करना" "दुआ करो", जमा' में हैं।

तुम सुन चुके हो कि कहा गया था।

इसका तर्जुमा वैसा ही करे जैसा MAT 5:33 में किया है।

यहाँ "पड़ोसी" लफ़्ज़ का मतलब है जाती के लोगों या वह सब लोग जिसके साथ सेखावत ज़ाहिर करने की उम्मीद हो या मदद करना जरुरी हो। इसका मतलब पास में रहनेवालों से नहीं है। आपको इसका तर्जुमा जमा' में करना होगा।

लेकिन मैं तुमसे यह कहता हूँ।

लेकिन मैं तुमसे कहता हूँ,इसका तर्जुमा वैसा ही करें जैसा आपने MAT 5:32 में किया है।

तुम अपने आसमानी बाप की औलाद ठहरोगे।

"तुम्हारा किरदार अपने बाप के जैसा होगा"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

Matthew 5:46

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 शुरू' हुआ था ।

'ईसा सब लोगों से बातें कर रहा है कि जाती तौर में उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम", "तुमसे" के सब मिसाल जमा' में हैं।

सलाम करो।

यह एक आम लफ़्ज़ है जो साम'ईन के फ़ायदा की दिली ख़्वाहिश ज़ाहिर करता है।

इन आयतों में चार सवाल हैं। यू.डी.बी.में दिखाया गया है कि उन्हें दा'वा कैसे बनाया गया है।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)