पाठ 69

1 हे परमेश्वर , हमार उद्धार करा , हम पानी मे डूब जाइला । 2 हम बड़ा दलदल मे धँसल जाइला अऊर हमार पैर कही नाही रुकत ; हम गहिरा पानी मे आ गयिलि , अऊर धारा में डूब जाइला । 3 हम पुकारत - पुकारत थक गइली , हमार गला सूख गयल हव ; अपने परमेश्वर क बाट जोहत जोहत , हमार आँख धुंधला पड़ गयल हव । 4 जवन अकारण हमार दुश्मन हयन , उ गिनती मे हमरे सिर के बाल से अधिक हयन ; हमार विनाश करअवालन जवन बेकार हमार दुश्मन हयन , उ सामर्थी हयन ,* ऐहिसे जवन हम लूटे नाही उ भी हमके देवअके पड़ल । 5 हे परमेश्वर , तू त हमरे मूढ़ता के जानअल , अऊर हमार दोष तोहसे छिपल नाही हव । 6 हे प्रभु , हे सेनाओ क यहोवा , जवन हमार बाट जोहअलन , ओनकर आशा हमरे कारण न टूटअ ; हे इस्राएल क परमेश्वर , जवन तोहके ढुढ़अलन , ऊ हमरे कारण अपमानित न हवअ । 7 तोहरे ही कारण हमार निन्दा भयल हव , अऊर हमार मुँह लज्जा से ढँपल हव । 8 हम अपने भाई के सामने अजनबी भइली , अऊर अपने सग भाई के नजर मे परदेशी ठहरल हई । 9 काहे कि हम तोहरे भवन के निमित्त जलत जलत भस्म भइली ।* अऊर जवन निन्दा उ तोहार करअलन , ऊह निन्दा हमके सहअ के पड़ला । 10 जब हम रोके अऊर उपवास करके दुःख उठावत रहे , तब ओसे भी हमार नामधराई ही भयल । 11 जब हम टाट क कपड़ा पहिनले रहली तब हमार दृष्टान्त ओनके मे चलत रहल । 12 फाटक के पास बइठअवाला हमरे विषय बातचीत करअलन , अऊर मदिरा पीयअ वाले हमरे पे लगअ वाला गीत गावअलन । 13 लेकिन हे यहोवा , हमार प्रार्थना त तोहरे प्रसन्नता के समय मे होत हव ; हे परमेश्वर , अपने करुणा के बहुतायत से , अऊर बचावअ के अपने सच्ची प्रतिज्ञा के अनुसार * हमार सुनलअ। 14 हमके दलदल मे से उबारा की हम धँस न जाई ; हम अपने दुश्मन से , अऊर गहिरा पानी मे से बच जाई । 15 हम धारा में डूब न जाई , अऊर न हम गहिरा पानी मे डूब मरी , अऊर न पाताल क मुँह हमरे ऊपर बन्द होवअ । 16 हे यहोवा , हमार सुन लअ , काहे कि तोहार करुणा उत्तम हव ; अपने दया के बहुतायत के अनुसार हमरे ओर ध्यान दअ । 17 अपने दास से आपन मुँह मत मोड़ा ; काहे कि हम संकट मे हई , फ़ुर्ती से हमार सुन ल । 18 हमरे निकट आके हमके छुड़ा लअ , हमरे दुश्मन से हमके छुटकारा दअ । 19 हमरे नामधराई अऊर लज्जा अऊर अनादर के तू जानअल : हमार सब द्रोही तोहरे सामने हयन । 20 हमार दिल नामधराई के कारण फट गयल , अऊर हम बहुत उदास हई । हम कउनो तरस खाये वाला क आशा त कइली , लेकिन केहूँ के ना पइली , अऊर शान्ति देवअ वाले के ढूढ़त त रहली , लेकिन केहूँ ना मिलल । 21 लोगन हमके खाये के बदे विष देहलन , अऊर हमार प्यास बुझावअ के बदे हमके सिरका पिअइलन ।* 22 ओनकर भोजन * ओनके बदे फन्दा हो जाई ; अऊर ओनके सुख के समय जाल बन जाई । 23 ओनके आँखन पे अंधेरा छा जाई , ताकि उ देख न सकअ ; अऊर तू ओनके कटि के निरन्तर कंपावत रहअ । * 24 ओनके ऊपर आपन रोष भड़कावा , अऊर तोहरे गुस्सा क आँच ओनके लगी । 25 ओनकर छावनी उजड़ जाई , ओनकरे डेरा मे केहूं न रही ।* 26 काहे कि जेके तू मरलअ , उ ओनकरे पीछे पड़ल हयन , अऊर जेके तू घायल कइलअ , उ ओनके पीड़ा क चर्चा करलन । 27 ओनकरे अधर्म पे अधर्म बढ़ावअ ; अऊर उ तोहरे धर्म के प्राप्त न करअ। 28 ओनकर नाम जीवन के किताब मे से काटल जाई ,* आउर धरमी के साथे लिखल न जाई । 29 लेकिन हम त दुःखी आउर पीड़ीत हई , ऐहिसे हे परमेश्वर , तू हमार उद्धार करके हमके ऊँचा जगह पे बइठावा । 30 हम गीत गाके तोहरे नाम क स्तुति करबला ,अऊर धन्यवाद करत के तोहार बड़ाई करबला । 31 इ यहोवा के बैल से अधिक , बल्कि सींग अऊर खुरवाले बैल से भी अधिक भाई । 32 नम्र लोग एके देखके खुश होइहन , हे परमेश्वर क खोजीयन , तोहार मन हरा हो जाई । 33 काहे कि यहोवा दरिद्रन के ओर कान लगावअलन , अऊर अपने लोगन के जवन बन्दी हयन तुच्छ ना जानअलन । 34 स्वर्ग अऊर धरती ओनकर स्तुति करअ , अऊर समुद्र अपने सब जीव जन्तु समेत ओनकर स्तुति करअ । 35 काहे कि परमेश्वर सिय्योन क उद्धार करिहन , अऊर यहूदा के नगर के फिर बसइहन ; अऊर लोग फिर उहा बसके ओनकर अधिकारी हो जइहन । 36 ओनके दास क अंश ओनके अपने भाग में पइहन , अऊर ओनके नाम के प्रेमी ओमन वास करीहन ।