1 हे परमेश्वर , हमरे पर अनुग्रह करा , काहे कि मनुष्य हमके निगलअ चाहत हयन; उ दिन भर लड़के हमके सतावलन । 2 हमार द्रोही दिन भर हमके निगलअ चाहलन, काहे कि जवन लोग अभिमान करके हमसे लड़लन उ बहुत हयन । 3 जउने समय हमके डर लगी , हम तोहरे पर भरोसा रखब । 4 परमेश्वर के सहायता से हम ओनके वचन क प्रशंसा करब , परमेश्वर पर हम भरोसा रखले हई , हम न डरब । कउनो प्राणी हमार का कर सकलन ? 5 उ दिन भर हमरे वचन क , उलटा अर्थ लगा लगाके मरोड़त रहलन ; ओनकर कुल कल्पना हमरअ ही बुराई करअक होला । 6 उ सब मिलके इकट्टा होलन अऊर छिपके बइठलन ; उ हमरे कदम के देखलन भालत हयन माना उ हमार प्राण के घात में ताक लगावल बइठल हयन । 7 का उ बुराई करके भी बच जइहन ? हे परमेश्वर , अपने गुस्सा से देश - देश के लोगन के गिरा दअ ! 8 तू हमरे मारे - मारे फिरअ क हिसाब रखलअ ; तू हमरे आँसू के अपने कुप्पी में रखला ! का ओनकर चर्चा तोहरे किताब मे ना हव ? 9 तब जउने समय हम पुकारब , वोही समय हमार दुश्मन उलट फिरीहन । इ हम जानत हई कि परमेश्वर हमरे ओर हयन । 10 परमेश्वर के सहायता से हम ओनकरे वचन क प्रशंसा करब , यहोवा के सहायता से हम ओनकरे वचन क प्रशंसा करब । 11 हम परमेश्वर पर भरोसा रखले हई , हम न डरब । मनुष्य हमार का कर सकलन ? 12 हे परमेश्वर , तोहरे मन्नत क भार हमरे पर बनल हव ; हम तोहके धन्यवाद बलि चढ़ाइबला । 13 काहे कि तू हमके मृत्यु से बचइले हय ; तू हमरे पैर के भी फिसल से बचइल , ताकि हम परमेश्वर के सामने जीवतो के उजियाला मे चली फिरी ?