पाठ 18

1 हे यहोवा, हे हमार बल ,हम तोहसे प्यार करीला। 2 यहोवा हमार चट्टान, अउर हमार गढ़ अउर हमार छुड़ाववाला हयन; हमार परमेश्वर, हमार चट्टान हयन, जेकर हम शरणागत हई, ओन हमार ढाल अउर हमार उद्धार क सींग, अउर हमार ऊँचा गढ़ हयन।(इब्रा.2:13) 3 हम यहोवा के जवन स्तुति के योग्य हयन पुकारबला; ए प्रकार हम अपने दुश्मनन से बचावल जाईबला। 4 मृत्यु के रस्सियन से हम चारों तरफ से घिर गयल हई*, अउर अधर्म क बाढ़ हमके भयभीत कर देहलेस;(भज.116:3) 5 अधोलोक क रस्सियन हमरे चारो ओर रहल, अउर मृत्यु क फंदा हमरे पे आयल रहल। 6 अपने संकट मे हम यहोवा परमेश्वर के पुकरली; हम अपने परमेश्वर के दुहाई देहली। अउर ओन अपने मन्दिर* मे से हमार आवाज सुनलन। अउर हमार दुहाई ओनकरे लग्गे पहुँचके ओनके कानन में पड़ल। 7 तब पृथ्वी हिल गयल, अउर काँप उठल अउर पहाड़न क नींव कँपित होके हिल गयल काहे कि उ अति क्रोधित भयल रहलन। 8 ओनके नथनन से धुआँ निकलल, अउर ओनके मुँह से आग निकल के भस्म करअ लगल; जेसे कोएला दहक उठल। 9 उ स्वर्ग के नीचे झुकाके उतर अइलन; अउर ओनकरे पाँवन तले घोर अंधकार रहल। 10 अउर ओन करूब पे सवार होके उड़लन, वरन् पवन के पंखन पे सवारी करके वेग से उड़लन। 11 ओन अंधियारे के आपन छिपअ क जगह अउर अपने चारों ओरी आकाश के काला बादलन क मण्डप बनईलन। 12 ओनकरे आगे बिजली से , ओला अउर अंगारा गिर पड़ल। 13 तब यहोवा आकाश मे गरजलन, परमप्रधान आपन वाणी सुनईलन अउर ओला अउर अंगारा के भेजलन। 14 ओन आपन तीर चला-चलाके दुश्मनन के तितर-बितर कइलन; वरन् बिजलियन के गिरा-गिराके ओनके हरा देहलन। 15 तब पानी क नाला देख पड़ल, अउर जगत क नींव प्रगट भयल, ई त यहोवा तोहरे डांट से*, अउर तोहरे नथनन के सांस के झोंका से भयल। 16 ओन ऊपर से हाथ बढ़ाके हमके थाम लेहलन, अउर गहरा पानी मे से खींच लेहलन। 17 ओन हमरे बलवन्त दुश्मन से, अउर ओनसे जे हमके घृणा करत रहल, हमके छुड़ईलन; काहे की उ ज्यादा समर्थी रहलन। 18 हमरे संकट के दिन उ हमरे विरुद्ध अइलन लेकिन यहोवा हमार आश्रय रहलन। 19 अउर ओन हमके निकालके चौड़ा जगह मे पहुँचइलन, ओन हमके छुड़इलन, काहे की उ हमसे खुश रहलन। 20 यहोवा हमसे हमरे धार्मिकता के अनुसार व्यवहार कइलन; अउर हमरे हाथन के शुद्धता के अनुसार ओन हमके बदला देहलन। 21 काहे कि हम यहोवा के रस्तन पर चलत रहली, अउर दुष्टता के वजह से अपने परमेश्वर से दूर ना भइली। 22 काहे कि ओनकर सब निर्णय हमरे सम्मुख बनल रहल अउर हम ओनकरे विधियन के न छोड़ली। 23 अउर हम ओनकरे सम्मुख सिद्ध बनल रहे, अउर अधर्म से अपने के बचाए रहे। 24 यहोवा हमके हमरे धार्मिकता के अनुसार बदला देहलन, अउर हमरे हाथन के ओ शुद्धता के अनुसार जेके ओन देखल रहलन। 25 विश्वासयोग्य के संगे तू अपने के विश्वासयोग्य दिखावलअ; अउर खरा आदमी के संगे तू अपने के खरा दिखावलअ। 26 शुद्ध के संगे तू अपने के शुद्ध दिखावलअ, अउर टेढ़ा के संगे तू तिरछा बनअलअ । 27 काहे की तू दीन लोगन के त बचावअलअ; लेकिन घमंड से भरल आंखन के नीचा करअलअ। 28 हाँ, तू ही हमरे दीपक के जलावअलअ; हमार परमेश्वर यहोवा हमरे अंधियारे के उजियाला कर देलन। 29 काहे की तोहरे सहायता से हम सेना पर धावा करिला; अउर अपने परमेश्वर के सहायता से शहरपनाह के लाँघ जाइला। 30 परमेश्वर क रस्ता सिद्ध हव; यहोवा क वचन तायल हुयल हव; ओन अपने सब शरणागतन क ढाल हयन। 31 यहोवा के छोड़ का कउनो परमेश्वर हयन? हमने के परमेश्वर के छोड़ का अउर कउनो चट्टान हव? 32 ई उहअ परमेश्वर हयन, जवन सामर्थ से हमार कटिबन्ध बाँधअलन, अउर हमरे रस्ता के सिद्ध करअलन। 33 ओनहीं हमरे पैरन के हिरनी के जइसन बनावलअन, अउर हमके ऊँचा जगहन पे खड़ा करअलन। 34 ओन हमरे हाथन के युद्ध करअ सिखावअलन, ए बदे हमरे बाँहन से पीतल क धनुष झुक जाला। 35 तू हमके अपने बचाव क ढाल देहले हयअ, तू अपने दहिने हाथ से हमके सम्भाले हुए हयअ, अउर तोहार नम्रता हमके महान बनईले हव। 36 तू हमरे पैरन के बदे जगह चौड़ा कर देहलअ*, अउर हमार पैर ना फिसलल। 37 हम अपने दुश्मनन क पीछा करके उ सब के पकड़ लेब; अउर जब तक उ सब क अन्त न करी तब तक न लउटब। 38 हम उ सब के अइसन बेधबला की उ सब उठ न सकीहन; उ सब हमरे पैरन के नीचे गिर जईहन। 39 काहे कि तू युद्ध के बदे हमरे कमर मे शक्ति क पटुका बंधले हयअ; अउर हमरे विरोधियन के हमरे सम्मुख नीचा कर देहलअ। 40 तू हमरे दुश्मनन क पीठ हमरे ओर फेर देहलअ; ताकि हम उ सब के काट डाली जे हमसे द्वेष रखअला। 41 उ लोग दुहाई त देहलन लेकिन उ सब के केहु बचावअवाला ना मिलल, उ सब यहोवा क भी दुहाई देहलन, लेकिन ओन भी उ सब के उत्तर नाही देहलन। 42 तब हम उ सब के कूट-कूटके हवा से उड़ावल गयल धूल के जईसन कर देहली; हम उ सब के रस्ते क कीचड़ के जइसन निकाल फेकली। 43 तू हमके प्रजा के झगड़न से भी छुड़इलअ; तू हमके अन्यजातियन क प्रधान बनईले हयअ; जवन लोग के हम जानत भी ना रहली उ हमार सेवा करत हयन। 44 हमार नाम सुनतअ ही उ हमरे आदेश क पालन करिहन; परदेशी हमरे वश मे हो जईहन। 45 परदेशी मुर्झा जईहन, अउर अपने किलन में से थरथरात हुवत निकलीहन। 46 यहोवा परमेश्वर जीवित हयन, हमार चट्टान धन्य हयन, अउर हमरे मुक्तिदाता परमेश्वर क बड़ाई होवअ। 47 धन्य हयन हमार पलटा लेवअवाला परमेश्वर! जे देश-देश के लोगन के हमरे वश में कर देहले हयन; 48 अउर हमके हमरे दुश्मनन से छुड़ईले हयन; तू हमके हमरे विरोधियन से ऊंचा करअलअ, अउर उपद्रवी आदमी से बचावअलअ । 49 ए वजह हम जाति-जाति के सामने तोहार धन्यवाद करबला, अउर तोहरे नाम क भजन गाईबला। 50 ओन अपने ठहराए हुअल राजा के महान विजय देलन, ओन अपने अभिषिक्त दाऊद पे अउर ओनकरे वंश पे युगानुयुग करुणा करत रईहन ।