Matthew 7

Matthew 7:1

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है "तुम", "तुम्हारे" और हुक्में जमा' में है।

तुम पर भी इलज़ाम लगाया जायेगा।

तुम पर भी इल्ज़ाम लगाया जायेगा, इसे मुन्तख़ब तौर पर इज़हार किया जा सकता है, "ख़ुदा तुम पर इल्ज़ाम लगायेगा"। (यू.डी.बी.) या "इन्सान तुम पर इल्ज़ाम लगायेंगे"।(देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-activepassive)

क्योंकि

इससे यक़ीन होता है कि पढ़ने वालो को समझना है कि आयत 2 आयत 1 पर मुनहसिर है।

नाप

इस के बारे में (1) सज़ा के नतीज़ा' से (देखें यू.डी.बी.) या (2)सज़ा कि क़ीमत से हो सकता है।

Matthew 7:3

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तू", "तेरी" वाहिद में हैं लेकिन आपको उनका तर्जुमा जमा' में करना होगा।

तुम क्यों देखते हो ... कैसे कह सकता है?

'ईसा उन्हें मुक़ाबला दे रहा है कि पहले अपने ही इल्ज़ाम/गुनाह पर तवज़्ज़ह दें। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

तिनका .... लट्ठा

ये दोनों मिसाल है जो इन्सान के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े इल्ज़ाम के लिए काम में लिए गए हैं। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

भाई

यह लफ़्ज़ ईमानदार के लिए है, न कि भाई या पड़ोसी के लिए है।

आँख

यह मिसाल ज़िन्दगी के लिए काम में लिया गया है।

ज़र्रा

"ज़र्रा" (यू.डी.बी.) या "लट्ठा" या "धूल" बराबर आँख में जो कुछ चला जाता है उसका लफ़्ज़ काम में लें।

लट्ठा

दरख़्त का सबसे बड़ा हिस्सा। एक ऐसी बड़ी चिज़ जो आँख में नहीं जा सकती। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hyperbole)

Matthew 7:6

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

कुत्तों ..... सूअरों.... रौंदे .... पलटकर .... फाड़ डालें।

हो सकता है कि सूअर "रौदेगें" और कुत्ते "फाड़ डालेगे"(यू.डी.बी)

कुत्ते ..... सूअर।

इन जानवरों को नापाक माना जाता था और ख़ुदा ने उन्हें खाना मना किया था। ये उन बेदिनो के लिए मिसाल है जो पाक चीज़ो को मानते नहीं करते है। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor) इन लफ़्ज़ो को तर्जुमा में ज्यों का त्यों रखना ही सही होगा।

मोती

ये क़ीमती नगीने हैं। ये ख़ुदा के 'ईल्म (देखें यू.डी.बी.) या 'आम तौर पर क़ीमती चीज़ो के लिए काम में लिए जाते हैं।

Matthew 7:7

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़' से बातें कर रहा है कि ज़ाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

मांगो.... ढूँढ़ो ....खटखटाओ

ये तीन मिसाल लगातार दुआ करने के लिए हैं। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor) अगर आपकी ज़बान में बार]] बार करने के लिए कोई लफ़्ज़ है तो उसका इस्ति'माल करें।

मांगो

ख़ुदा से इल्तेमास करना (देखें यू.डी.बी.)

ढूँढ़ो

"उम्मीद" (यू.डी.बी.) या "खोज करो"।

खटखटाओ

खटखटाना एक नम्र गुजारिश है कि घर में मौजूद लोगों के ज़रिए' खोल दे। अगर खटखटाना आपकी ज़बान में नामुनासिब लफ़्ज़ है तो आपकी ज़बान के ज़रिए' खोलने कि नम्र गुजारिश के लिए जो लफ़्ज़ है उसे काम में ले या तर्जुमा करें, "ख़ुदा से कहें कि आप उसके ज़रिए' खोलने का गुजारिश करते हैं"।

या .... या

'ईसा अपनी बातों को दूसरे लफ़्ज़ो में कहने जा रहा है इन्हें छोड़ा जा सकता है। (यू.डी.बी.)

तुममें ऐसा कौन इन्सान है?

इस बनावटी सवाल का मक़सद है कि "ऐसा कोई भी नहीं है" (देखें यू.डी.बी. /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

रोटी .... पत्थर .... मछली .... साँप

इनको ज्यों का त्यों रखें।

रोटी

"खाना"

Matthew 7:11

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

तुम चाहते हो कि इन्सान तुम्हारे साथ करे।

"तुम अपने लिए इन्सानों के जैसा सुलूक चाहते हो"(यू.डी.बी.)।

Matthew 7:13

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

'ईसा भीड़ से बातें कर रहा है कि जाती तौर पर उनके साथ क्या हो सकता है। "तुम" जमा' में है।

तर्जुमा करने में "चौड़ा" और "बड़ा" के लिए मुनासिब लफ़्ज़ो का इस्ति'माल करें जो "पतला" के बर'अक्स हैं। जहाँ तक मुमकिन हो इन दोनों दरवाजों में इन्तिहाई फ़र्क को उभारें।

सकेत फाटक से दाख़िल करो।

आपके लिए इस जुमला को आयत 14 के आखिर में रखने की ज़रूरत हो सकती है, "इसलिए तंग दरवाज़ा से दाख़िल करो"।

दरवाज़े का .... रास्ता

यह मिसाल, बहुत मुमकिन है कि उन इन्सानों के लिए है जो "राह" में चलकर "दरवाज़ा" तक पहुचते हैं और "ज़िन्दगी" या "तबाही" में दाख़िल करते हैं (देखें यू.डी.बी. /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor))। लिहाजा आपको मुमकिन तर्जुमा इस तरह करना होगा, "चौड़ा रास्ता वह है जो तबाही की तरफ़ ले जाता है और चौड़ा दरवाज़ा वह है जिससे होकर इन्सान उसमें दाख़िल करता है"। कुछ लोग "दरवाज़ा" और "रास्ता" को hendiadys मानते हैं जिसके जिक्र की ज़रूरत नहीं है। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-hendiadys)

चौड़ा है वह दरवाज़ा और आसन है वह रास्ता .... सकेत है वह दरवाज़ा और मुश्किल है वह रास्ता।

यू.एल.बी. में वाक्यों से पहले सिफ़तो का इस्तिमाल किया गया है कि सिफतो में सही ज़ाहिर हो। अपनी तर्जुमा की रचना इस तरह करें कि आपकी ज़बान में सिफ़तो का सही ज़ाहिर हो।

तबाही

यह इन्सानों के बर्बादी के लिए एक 'आम लफ़्ज़ है। यहाँ बारे की बुनयाद पर यह हक़ीकत में जिस्मानी मौत है। (देखें यू.डी.बी.) जो हमेशा कि मौत का मिसाल है। यह जिस्मानी "ज़िन्दगी" का उल्टा है, "ज़िन्दगी" अब्दी ज़िन्दगी का मिसाल है। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)]]

Matthew 7:15

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

ख़बरदार रहो।

"बचे रहो"

उनके फलों से

'ईसा नबीओं के कामों की बदले दरख्त के फलों से करता है। इख़्तियारी तर्जुमा "उनके कामों से"। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor)

क्या लोग.....तोड़ते हैं?

"इन्सान .... से नहीं तोड़ते हैं" 'ईसा जिन लोगों से बातें कर रहा है वे जानते हैं कि उसके सवाल का जवाब "नहीं" है। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-rquestion)

अच्छा दरख़्त .... अच्छा फल लाता है।

ईसा फल के मिसालके ज़रिए' सच्चे नबीओं का बयान करता है जो अच्छे काम और अच्छे लफ़्ज़ पैदा करते हैं।

निकम्मा दरख़्त बुरा फल लाता है।

ईसा फल के मिसाल के ज़रिए' ही झूठे नबीओं के कामों और लफ़्ज़ो का ' मिसाल पेश करता है।

Matthew 7:18

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

जो दरख़्त अच्छा फल नहीं लाता वह काटा और आग में डाला जाता है।

ईसा फल के दरख़्त की तशबीह के ज़रिए' झूठे नबीओं का नक़ाब करता है, यहाँ वह सिर्फ़ इतना ही कहता है कि निकम्मे दरख़्त का क्या होता है। यहाँ मक़सद आखिर हे कि झूठे नबीओं के साथ भी ऐसा ही होगा। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-metaphor, /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-explicit))

उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।

"उनके फलों से" या तो नबी या दरख्तो के बारे में है। इस मिसाल का मक़सद है कि दरख्तों के फल और नबीओं के काम दोनों ही से ज़ाहिर होता है कि वे अच्छे हैं या बुरे। अगर मुमकिन हो तो इसका तर्जुमा इस तरह करें कि उसके बारे दोनों ही से हो।

Matthew 7:21

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

जो मेरे आसमानी बाप की ख्वाहीश पर चलता है।

"मेरे बाप की ख्वाहिश को पूरा करनेवाला"।

हम

इसमें 'ईसा नहीं है। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-exclusive)

उस दिन

'ईसा ने सिर्फ़ "उस दिन" कहा क्योंकि उसके सैम’इन' समझते थे कि उसके कहने का मतलब है, इन्साफ़ के दिन। आपको इस हक़ीक़त को बे नक़ाब करना है (जैसा यू.डी.बी. में है) अगर आपके पढ़ने वाले नहीं समझें कि 'ईसा के समा' इन समझते थे कि 'ईसा किस दिन की गुफ़्तगू कर रहा है।

Matthew 7:24

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

इसलिए

"इस वजह"

अक़लमन्द इन्सान ने .... अपना घर चट्टान पर बनाया।

'ईसा उसके कलामो पर चलने वालों की बराबरी उस सख्श से करता है जिसने पक्का घर बनाया। तवज़्ज़ह दें कि बारिश, आँधी और बाढ़ उस घर को ढा नहीं पाए। (देखें /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile) )

चट्टान

ज़मीन की अपनी सतह के नीचे की ठोस पत्थरीली हिस्सा है, न कि एक चट्टान जो उभरी हुई हो।

Matthew 7:26

'ईसा अपने शागिर्दों को ता'लीम दे रहा है, यह वाक़े'आ MAT 5:1 में शुरू' हुआ था ।

इस बेवकूफ़ इन्सान कि तरह ठहरा जिसने अपना घर बालू पर बनाया।

'ईसा उसी तशबीह को काम में ले रहा है जो उसने MAT 7:24 में काम में ली है। वह उन लोगों की मुक़ाबला एक बेवकूफ़ घर बनाने से कर रहा है जो उसके कलामो पर नहीं चलते। सिर्फ़ एक बेवकूफ़ ही बालू पर घर खड़ा करेगा कि बारिश, बाढ़, आंधी बालू को बहा ले जाए। (देखें: /WA-Catalog/ur-deva_tm?section=translate#figs-simile))

गिरकर तबाह हो गया।

आम इस्ति'माल का लफ़्ज़ काम में ले जो यह दिखाता है कि घर के गिर जाने पर क्या होता है।

तबाह हो गया।

वारिश, बाढ़ और आंधी से घर बिखर गया।

Matthew 7:28

ऐसा हुआ।

अगर आपकी ज़बान में कहानी के नए मोड़ को दिखाने का तरीक़ा है तो उसे यहाँ काम में लें।(देखें:TAlink:Discourse))