1 हे पूरा धरती क लोग , परमेश्वर के खातिर जयजयकार करअ; ; 2 ओनके नाम के महिमा क भजन गावा ; ओनकर स्तुति करत के ओनकर महिमा करअ । 3 परमेश्वर से कहा , " तोहार काम कितना भयानक हव ! तोहार महासामर्थ्य के कारण तोहार शत्रु तोहार चापलूसी करिहन । 4 पूरा धरती क लोग तोहके दण्डवत् करिहन अऊर तोहार भजन गइहन ; उ तोहरे नाम क भजन गइहन । " 5 आवा परमेश्वर के काम के देखअ ; उ अपने काम के कारण मनुष्य के भययोग्य देख पड़त हयन । 6 उ समुद्र के सूखा जमीन कर डललन ; उ महानद मे से पाँव - पाँव पार उतरलन ऊहा हम ओकरे कारण खुश भए । 7 जवन अपने पराक्रम से सर्वदा प्रभुता करअलन , अऊर अपने आँख से जाति - जाति के ताकअलन । हठीले आपन सिर मत उठाय। 8 हे देश - देश क लोग , हमरे परमेश्वर के धन्य कहअ , अऊर ओनकर स्तुति मे राग उठावा , 9 जवन हम के जीवित रखअलन ; अऊर हमरे पाँव के टलअ ना देतन । 10 काहे कि हे परमेश्वर , तू हम के जचलअ ; तू ' हमके चाँदी के समान तईले रहलअ । 11 तू हम के जाल मे फँसइलअ ; अऊर हमरे कमर पे भारी बोझ बधले रहलअ ; 12 तू घुड़चढ़न के हमरे सिर के ऊपर से चलइलअ , हम आग अऊर जल से होके गए ; लेकिन तू हम के उबार के सुख से भर देहले हयअ । 13 हम होमबलि लेके तोहरे भवन मे आइबला ; हम उ मन्नत के तोहरे खातिर पूरा करबला , 14 जवन हम मुँह खोल के मनली , अऊर संकट के समय कहले रहली । 15 हम तोहके मोटन पशुअन क होमबलि , मेढ़न क चर्बी क धूप समेत चढ़ाइबला ; हम बकरा समेत बैल चढ़ाइबला । 16 हे परमेश्वर क सब डरवैयन , आके सुना , हम बताइबला कि उ हमरे खातिर का का कईले हयन । 17 हम ओके पुकरली , अऊर ओही क गुणानुवाद हमसे भयल । 18 अगर हम मन मे अनर्थ क बात सोचित , त प्रभु हमार न सुनतन । 19 लेकिन परमेश्वर त सुनले हयन ; उ हमरे प्रार्थना के ओर ध्यान देहले हयन । 20 धन्य हव परमेश्वर , जवन न त हमार प्रार्थना अनसुनी कइलन , अऊर न हम से आपन करुणा दूर कई देहले हयन !