पाठ 42

1 जइसे हिरन नदी के पानी बदे हाँफअला, ओइसहीं, हे परमेश्वर, हम तोहरे बदे हाँफत हई। 2 जिंदा परमेश्वर, हाँ परमेश्वर, क हम प्यासल हई, हम कब जाके परमेश्वर के आपन मुँह देखाईबला?(भज. 63:1, प्रका. 22:4) 3 हमार आँसू दिन अउर रात हमार खाना भयल हव; अउर लोग दिन भर हमसे कहत रहअलन, कि तोहार परमेश्वर कहाँ हयन? 4 हम कइसे भीड़ के संग्गे जात रहे, हम जयजयकार अउर धन्यवाद के साथ उत्सव करेवालन भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन में धीरे-धीरे जात रहे; ई याद करके हमार प्राण शोकित हो जाला। 5 हे हमार प्राण, तू काहे गिरल जात हयअ? अउर तू अन्दर ही अन्दर काहे व्याकुल हयअ? परमेश्वर पे आशा लगईले रहा; काहे कि हम ओनके दर्शन से उद्धार पाके फिर से ओनकर धन्यवाद करब। (मत्ती 26:38, मर. 14:34, यूह. 12:27) 6 हे हमार परमेश्वर; हमार प्राण हमरे भीतर गिरल जात हव, ऐ बदे हम यरदन के लग्गे के देश से अउर हेर्मोन के पहाड़न अउर मिसगार के पहाड़ी के ऊपर से तोहके याद करत हई। 7 तोहरे पानी के धारा क आवाज सुन के पानी, पानी के पुकारअला*; तोहरे कुल तरंगन अउर लहरन में हम डूब गयल हई। 8 तभो दिन के यहोवा अपने शक्ति अउर करुणा के प्रगट करिहन। अउर रात के भी हम ओनकर गीत गाईबला, अउर अपने जीवनदाता परमेश्वर से प्रार्थना करबला। 9 हम परमेश्वर से जे हमार चट्टान हयन कहबला, "तू हमके काहे भुला गईलअ? हम दुश्मन के अत्याचार के मारे काहे शोक क पहिरावा पहिनले चलत फिरत हई?" 10 हमार सतावअवाले जे हमार निंदा करअला, माना ओसे हमार हड्डीयन चूर-चूर होलिन, माना कटार से छिदल जाला, काहे कि उ दिन भर हमसे कहत रहअलन, तोहार परमेश्वर कहाँ हयन? 11 हे हमार प्राण तू काहे गिरल जात हयअ? तू अन्दर ही अन्दर काहे व्याकुल हयअ? परमेश्वर पे भरोसा रखा; काहे कि ओन हमरे मुख क चमक अउर हमार परमेश्वर हयन, हम फिर ओनकर धन्यवाद करबला।( भज. 43:5, मर. 14:34, यूह. 12:27)